Saturday, 6 September 2014

cucumber-poem/hindi

ककड़ी-खीरा
गर्मी में जब प्यास लगे
पानी की जब आस लगे
सब्जी की दूकान में जाओ
ककड़ी-खीरा खरीद के लाओ|
ककड़ी-खीरा खूब चबाओ
खा के इनको प्यास बुझाओ|
खूब विटामिन, उर्जा पाओ
‘गर्मी की ठंडक’ ले आओ|
ककड़ी होती लंबी, पीली
खीरा हरा व् मोटा होता|
खा के इनको प्यास यूं बुझती—

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